Cash Deposit करते समय ये गलती ना करें, नहीं तो आ सकता है इनकम टैक्स नोटिस,जानें कैसे बचें ₹2 लाख से ज्यादा कैश ट्रांजैक्शन पर भारी जुर्माना।

आपने बहुत मेहनत से पैसे कमाते हैं और जब आप Cash Deposit बैंक में जमा करते हैं, तो कुछ दिनों बाद आपके पास आयकर विभाग का नोटिस आ जाता है। सोचिए, आपको कैसा लगेगा? यही स्थिति तब भी होती है जब आप अपनी विरासत की जमीन बेचते हैं और उस पैसे को बैंक में जमा करने जाते हैं। फिर भी आपको आयकर का नोटिस आ जाता है। इससे आपको दुख और परेशानी हो सकती है और आप कानूनी मामलों में भी फंस सकते हैं। इसलिए, इस लेख में बने रहिये हम आपको बताएंगे कि बैंक में पैसे जमा करते समय कौन सी गलतियाँ नहीं करनी हैं और कितना पैसा रखना चाहिए ताकि हमें आयकर का नोटिस न आए।

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पहला नियम यह कहता है कि आप कितने भी पैसे का लेन-देन कर सकते हैं और कितना भी पैसा बैंक में रख सकते हैं, अगर आप नियमित रूप से आयकर रिटर्न (ITR) फाइल करते हैं और टैक्स चुकाते हैं। चाहे आप ₹10 लाख रखिये , ₹10 करोड़ रखिये या उससे भी ज्यादा, आपको कोई दिक्कत नहीं आने वाली है।

दूसरा नियम यह होता है कि यदि आपने वित्त वर्ष 2020-21, 2021-22, 2022-23 में कोई ट्रांजैक्शन किया है और अभी तक नोटिस नहीं आया है, तो इसका मतलब यह नहीं है कि आप बच गए हैं। आपको अगले 8 साल तक कभी भी नोटिस आ सकता है। यानी यदि आप 2024 में भी ट्रांजैक्शन कर रहे हैं, तो 2032 तक आपको नोटिस आ सकता है। इन दो नियमों को हमेशा याद रखें।

Cash Deposit
IMAGE CREDIT TO FREEPIK

Cash Deposit सेविंग बैंक अकाउंट

अब हम जानते हैं सेविंग बैंक अकाउंट के बारे में कि कितना पैसा रखा जा सकता है। सबसे महत्वपूर्ण नियम यह है कि कभी भी एक वित्तीय वर्ष में सेविंग बैंक अकाउंट में ₹10 लाख से ज्यादा कॅश जमा नहीं करना चाहिए। यह तो पूरे साल की बात है, लेकिन अगर हम एक दिन की बात करें, तो एक दिन में ₹2 लाख या उससे ज्यादा कॅश जमा करने से बचना चाहिए। एक ट्रांजैक्शन में भी ₹2 लाख से ज्यादा कॅश जमा करने से आपको बचना चाहिए।

आप एक बार में ₹2 लाख या पूरे साल में ₹10 लाख जमा करेंगे तो आपको आयकर विभाग से नोटिस गारंटीड मिल जाएगा। वह इसलिए कि इतने बड़े लेन-देन को बैंक वाले आयकर विभाग को सूचित करते हैं कि इस बैंक अकाउंट से, जो इस पैन नंबर से लिंक है, ऐसा लेन-देन हुआ है। इसके बाद आयकर विभाग इसकी जांच करता है और यदि कुछ गड़बड़ी पाई जाती है तो हो सकता है कि आपको नोटिस भेजा जाए।

अब सवाल आता है कि एक ट्रांजैक्शन में ₹2 लाख या साल भर में ₹10 लाख से ज्यादा कैश किसके पास होता है। आमतौर पर, यह स्थिति उन लोगों की होती है जो कच्चा बिजनेस करते हैं, जिनका रोज का लेन-देन कैश में होता है। दूसरा उदाहरण ग्रामीण क्षेत्रों में देखा जाता है, जहां लोग जमीन की बिक्री करते हैं। जब कोई बड़ी जरूरत आन पड़ती है, जैसे किसी की शादी या बीमारी, तो वे जमीन बेचते हैं और वहां से कैश में पैसा लेते हैं।

यहां सबसे बड़ी गलती हम यह करते हैं कि हम इस लिमिट का ध्यान नहीं रखते। एक साल में ₹10 लाख से ज्यादा कैश जमा नहीं करना चाहिए। मान लीजिए आपने ₹10 लाख की जमीन बेची और ₹10 लाख कैश ले लिया। चूंकि एग्रीकल्चरल लैंड टैक्स में नहीं आती, आप सोचते हैं कि कोई टैक्स नहीं लगेगा और इस पैसे को बैंक में जमा कर देते हैं। बात तो सही है, लेकिन जैसे ही आप ₹10 लाख से ज्यादा जमा करते हैं और बैंक ने आयकर विभाग को सूचित कर दिया, तो आपको नोटिस आ सकता है।

आप सोचते हैं कि आप बता देंगे कि यह पैसा खानदानी जमीन बेचने का है और इस पर कोई टैक्स नहीं लगता, लेकिन आयकर विभाग कहेगा कि ठीक है। समस्या यह है कि सेक्शन 269ST के अनुसार, कोई भी व्यक्ति एक सिंगल ट्रांजैक्शन में या एक अवसर पर ₹2 लाख या उससे ज्यादा का कैश लेन-देन नहीं कर सकता। इस पर जितना ट्रांजैक्शन किया है उतना या उससे ज्यादा फाइन लग सकता है। इस स्थिति में आप फंस सकते हैं, इसलिए आपको इस नियम का ध्यान रखना चाहिए।

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बैंक से पैसे निकलने के नियम

अब हम बात करते हैं पैसे निकालने की। क्या पैसे निकालने पर भी कोई पाबंदी है?

असल में, आयकर विभाग ने पैसे निकालने पर कोई पाबंदी नहीं लगाई है। इंटरनेट पर कई जगह बताया जाता है कि अगर आप ₹2 लाख या उससे ज्यादा निकालते हैं तो समस्या हो सकती है, लेकिन ऐसा नहीं है। आपको थोड़ा सावधान रहना चाहिए, लेकिन इससे समस्या नहीं होगी।

मान लीजिए एक व्यक्ति की मासिक सैलरी ₹2 लाख है। इस हिसाब से वह साल में ₹24 लाख कमाता है। यदि वह नए टैक्स ब्रैकेट में है, तो उसे कोई टैक्स नहीं देना पड़ेगा। उसने 10 साल तक इसी तरह कमाया और पैसे जमा किए, तो कुल ₹2.4 करोड़ जमा हुआ। अब यदि वह बैंक से ₹20 लाख निकालना चाहता है, तो वह निकाल सकता है क्योंकि उसका पैसा हर साल टैक्सेबल लिमिट से नीचे था, इसलिए उसे कोई समस्या नहीं होगी।

हालांकि, एक नियम और है कि अगर आप ₹20 लाख से ज्यादा निकाल रहे हैं और आपने आईटीआर नहीं भरा है, तो आपको 2% टीडीएस देना पड़ेगा। शायद आपके मन में यह सवाल आ सकता है कि क्या यह लिमिट ₹2 लाख का है। मैं स्पष्ट कर दूं कि ₹2 लाख का जो लिमिट है, वह कैश ट्रांजैक्शन के लिए है। जब सरकार ने कैश ट्रांजैक्शन की लिमिट ₹2 लाख लगाई, तो लोगों ने सोचा कि बैंक से भी कैश निकालने पर यह लिमिट होगी। बाद में आयकर विभाग (सीबीडीटी) ने स्पष्ट किया कि बैंक या पोस्ट ऑफिस से आप जितना चाहें उतना कैश निकाल सकते हैं।

सेविंग अकाउंट में जमा और एफडी की बात करें तो एफडी में कैश डिपॉजिट ₹10 लाख से ज्यादा नहीं होना चाहिए। इसका सबसे बड़ा कारण यह है कि अगर आप ₹10 लाख से ज्यादा की एफडी खोलते हैं, तो आयकर विभाग को इसकी सूचना जाएगी और वे आपसे पूछेंगे कि यह कैश कहां से आया और क्या आपने इस पर टैक्स दिया है। यदि आपके बैंक अकाउंट में पहले से पैसा है और आप उसे एफडी में डालते हैं, तो टीडीएस के अलावा कोई समस्या नहीं होगी।

कॅश पर कोई पाबंदी है?

क्रेडिट कार्ड की बात करें तो क्रेडिट कार्ड का भुगतान ₹1 लाख से ज्यादा कैश में नहीं करना चाहिए। अगर आप बैंक जाकर ₹1 लाख का क्रेडिट कार्ड बिल कैश में भरते हैं, तो यह समस्या बन सकता है। ऑनलाइन पेमेंट करें और एक दिन में ₹10 लाख से ज्यादा का ऑनलाइन ट्रांजैक्शन न करें। यह लिमिट साल भर के लिए है। अगर आप साल में ₹10 लाख से ज्यादा का क्रेडिट कार्ड से लेन-देन करते हैं और टैक्सेबल लिमिट क्रॉस करते हैं, तो आयकर विभाग को सूचित किया जाता है।

रियल एस्टेट में अगर आप ₹30 लाख से ज्यादा की संपत्ति खरीद रहे हैं, तो रजिस्ट्री के समय रजिस्ट्रार को इसकी सूचना देनी होती है। आयकर विभाग इसकी जांच करेगा और अगर उन्हें कोई गड़बड़ी लगेगी तो वे नोटिस भेज सकते हैं।

करंट अकाउंट में, एक वित्तीय वर्ष में ₹10 लाख से ज्यादा कैश डिपॉजिट नहीं करना चाहिए। इससे बचें क्योंकि करंट अकाउंट में डायरेक्टली एफडी नहीं होती है।

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सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि कैश डिपॉजिट करने से बचें और जितना हो सके ऑनलाइन ट्रांजैक्शन करने की कोशिश करें। एक बार में ₹2 लाख से ज्यादा का कैश ट्रांजैक्शन न करें। जमीन बेचने पर, ₹15 लाख की जमीन की बिक्री पर चेक या ऑनलाइन पेमेंट लें, कैश न लें। अगर आयकर विभाग पता चलता है कि आप ₹2 लाख से ज्यादा कैश में लेन-देन कर रहे हैं, तो शायद आपको फाइन हो सकता है।

निष्कर्ष

कैश लेनदेन को समझदारी से समझना बहुत जरूरी है ताकि हमें आयकर विभाग के साथ किसी भी समस्या का सामना न करना पड़े। बैंक खातों में कैश जमा करना, क्रेडिट कार्ड के माध्यम से भुगतान करना या रियल एस्टेट में निवेश करना – इन सभी परिस्थितियों और कानूनी नियमो को समझना और उनका पालन करना जरूरी है।

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